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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 314
स्कन्धेनादाय मुशलं लगुडं वाऽपि खादिरम्‌ । शक्ति चोभयतस्तीक्ष्णामायसं दण्डमेव वा ।।
बालों को खोले हुए दोड़कर राजा के पास जाकर "मैने ऐसा कार्य (ब्राह्मण के सुवर्ण की 'चोरी) किया है, मुझे दण्डित कीजिए” ऐसा राजा से कहे।
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