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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 313
राजा स्तेनेन गंतव्यो मुक्तकेशेन धीमता । आचक्षाणेन तत्स्तेयमेवंकर्माऽ स्मि शाधि माम्‌ ।।
ब्राह्मण के सुवर्ण को चुराने वाला चोर कन्धे पर मुसल या खैर कत्थे की लाठी या दोनों ओर तेज शक्ति (दोनों ओर धार वाली बर्छी) या लोहे का डण्डा लिये तथा
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