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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 312
यः क्षिप्तो मर्षयत्यात्तैस्तेन स्वर्गे महीयते । यस्त्वैश्वर्यान्न क्षमते नरकं तेन गच्छति ।।
जो राजा दुःखितो के आक्षिप्त (कठोर वचनों को) सहता है, उससे वह स्वर्ग में पूजित होता (आदर पाता) है; किन्तु जो ऐश्वर्य (स्वामित्व के अभिमान) से (दुःखितो के आक्षेपों को) नहीं सहता है, उससे वह नरक जाता है।
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