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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 309
अधार्मिकं त्रिभिन्यायैर्निगृह्णीयात्मयत्नतः । निरोधनेन बन्धेन विविधेन वधेन च ।।
(अतएव धार्मिक राजा अपराध के अनुसार) विरोध (हवालात या कैदखाने में बन्द) करना, बन्धन (हथकड़ी, बेड़ी आदि डालना) और अनेक प्रकार के वध (ताडनमारण आदि); इन तीन उपायों से अधार्मिक (चोर आदि) का प्रयत्नपूर्वक निग्रह (कर उन्हे दण्डित) करे।
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