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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 308
अनवेक्षितमर्यादं नास्तिक विप्रलुम्पकम्‌ । अरक्षितारमत्तारं नृपं विद्यादधोगतिम्‌ ।।
शास्तरमर्यादा को नहीं मानने वाले, नास्तिक, (लोभादि के वशीभूत होकर) अनुचित दण्ड आदि के द्वारा धन लेने वाले, रक्षा नहीं करने वाले और (कर, बलि आदि का) भोग करने वाले राजा की अधोगति जाननी चाहिये।
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