(निर्दोष प्रजा की दुष्ट चौरादि से) रक्षा नहीं करता हुआ तथा (प्रजा से) छठे भाग के रूप में बलि (राजग्राह्य भाग) को लेता हुआ सब लोकों के सब पापों का हरण (ग्रहण) करने वाला होता है, ऐसा मनु आदि ऋषि कहते हैं।
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