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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 307
अरक्षितारमत्तारं बलिषड्भागहारिणम्‌ । तमाहुः सर्वलोकस्य समग्रमलहारकम्‌ ।।
(निर्दोष प्रजा की दुष्ट चौरादि से) रक्षा नहीं करता हुआ तथा (प्रजा से) छठे भाग के रूप में बलि (राजग्राह्य भाग) को लेता हुआ सब लोकों के सब पापों का हरण (ग्रहण) करने वाला होता है, ऐसा मनु आदि ऋषि कहते हैं।
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