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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 304
यदधीते यद्यजते यद्ददाति यदर्चति। तस्य षड्‌ भागभाग्राजा सम्यग्भवति रक्षणात्‌ ।।
(राज्य में रहने वाली प्रजा) जो (वेदादि) पढ़ती है, यज्ञ करती हे, दान देती है तथा (देवादि का) पूजन करती है; उस (पुण्य) का छठाँ भाग अच्छी तरह (प्रजा की) रक्षा करने वाले राजा को प्राप्त होता है।
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