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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 303
सर्वतो धर्मषड्भागो राज्ञो भवति रक्षतः । अधर्मादपि षड्भागो भवत्यस्य ह्यरक्षतः ।।
प्रजाओं की रक्षा करने वाले राजा को सबके धर्म का छठा भाग प्राप्त होता है और (प्रजा की) रक्षा नहीं करने वाले राजा को अधर्म का भी छठा भाग प्राप्त होता है।
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