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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 3
प्रत्यहं देशदृष्टैश्च शास्त्रदृष्टैश्च हेतुभिः । अष्टादशसु मार्गेषु निबद्धानि पृथक्‌ पृथक्‌ ।।
अट्टारह (८।४-७) व्यवहार-मार्गो के कार्यो को देश, जाति तथा कुल के व्यवहारों से और साक्षी, द्रव्य आदि कारणों से प्रतिदिन पृथक्‌-पृथक्‌ विचार करे।
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