(अभिभावक) उन्हें (रस्सी या पतली बाँस की छड़ी) से पीठ पर मारे, मस्तक पर कदापि न मारे अन्यथा मस्तक पर मारता हुआ मनुष्य चोर के समान पाप (वाग्दण्ड, बनधन दण्डादि) का भागी होता है।
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