भार्या पुत्रश्च दासश्च प्रेष्यो भ्राता च सोदरः ।
प्राप्तापराधास्ताङ्याः स्यू रज्ज्वा वेणुदलेन वा ।।
स्री, पुत्र, दास, प्रेष्य (बाहर भेजा जानेवाला नौकर), सहोदर (छोटा) भाई यदि अपराध करे तो उसे रस्सी से या पतली बाँस की छड़ी से (शिक्षार्थ) ताडून करना चाहिये।
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