(अब एक बार अपराध होने पर दण्ड-विधान कहते हैं--) सारथि की असावधानी से मनुष्य के मर जाने पर उसे (सारथि को) चोर के समान पाप लगता है (अतः वह उत्तम साहस” अर्थात् १००० पण से दण्डनीय होता है), तथा बड़े जीव, ऊंट, गाय, बैल, हाथी, घोड़ा आदि के मरने पर आधा पाप लगता है (अत: वह “मध्यम साहस” अर्थात् ५०० पण से दण्डनीय होता है)।
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