स चेत्तु पथि संरुद्धः पशुभिर्वा रथेन वा ।
प्रमापयेत्प्राणभृतस्तत्र दण्डोऽविचारितः ।।
मार्ग में रथ-पशुओं या रथादि से रुका हुआ भी सारथि रथ (गाड़ी आदि) हांके और (उसी कारण) किसी की मृत्यु हो जाय तो राजा बिना विचार किये अर्थात् शीघ्र ही उस सारथि को दण्डित करे।
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