यदि सारथि चतुर हो (और कोई वस्तु नष्ट हो जाय) तो वही (सारथि ही) दो सौ पण से दण्डनीय होता है तथा यदि सारथि चतुर नहीं हो तो उस (रथ गाड़ी आदि) पर सवार होने वाले प्रत्येक व्यक्ति (मूर्ख सारथि वाले सवारी पर चढ़ने के कारण) सौसौ पण से दण्डनीय होते हैं (और स्वामी को दो सौ पण से दण्डनीय होने का विधान पहले) (८।२९३ कह ही चुके हैं)।
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