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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 292
यत्रापवर्तते युग्यं वैगुण्यात्प्राजकस्य तु । तत्र स्वामी भवेद्दण्ड्यो हिंसायां द्विशतं दमम्‌ ॥॥
जहाँ सारथि की मूर्खता से रथ के इधर-उधर अर्थात्‌ उल्टा-सीधा होने के कारण कोई मर जाय तो (मूर्ख सारथि रखने के कारण उसके स्वामी पर) दो सौ पण (८।१३६) दण्ड होता है।
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