छेदने चैव यन्त्राणां योक्त्ररश्म्योस्तथैव च ।
आक्रन्दे चाप्यपैहीति न दण्डं मनुरब्रवीत् ।।
(७) चमड़े (या रस्सी आदि) के जोड़ कट (या खुल), जाने पर (८) जोता (बैल आदि रथवाहक पशु के गले में लगी हुई रस्सी) के टूट जाने पर, (९) रास (सारथि के हाथ द्वारा पकड़ी जाने वाली रस्सी) के टूट जाने पर और (१०) “हट जावो, हट जावो” ऐसा सारथि के चिल्लाने पर (यदि कोई वस्तु नष्ट हो जाय या कोई मर जाय तो सारथि आदि) कोई दंडनीय नहीं होता है ऐसा मनु ने कहा है।
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