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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 290
छिन्ननास्ये भग्नयुगे तिर्यकप्रतिमुखागते । अक्षभङ्गे च यानस्य चक्रभङ्गे तथैव च ॥॥
(१) बैल के नाथ टूट जाने पर, (२) जूवा के टूट जाने पर, (३) भूमि के ऊँची-नीची होने से गाड़ी के तिर्छा (एकवाई) हो जाने पर, (४) उलट जाने पर, (५) धूरा टूट जाने पर, (६) पहिया टूट जाने पर,
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