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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 29
प्रनष्टस्वामिकं रिक्थं राजा त्र्यब्दं निधापयेत्‌ । अर्वाक त्र्यब्दाद्धरेत्स्वामी परेण नृपतिर्हरेत्‌ ।।
राजा अस्वामिक (लावारिस) धन को तीन वर्ष तक सुरक्षित रखे (“यह किसका धन है? कहाँ तथा किस प्रकार खो गया था?” इत्यादि घोषणाकर राजद्वार आदि सबके देखने योग्य स्थान पर रखे), तीन वर्ष के पहले उस धन का स्वामी (प्रमाण देकर) उस धन को ले जावे तथा तीन वर्ष के बाद राजा उस धन को अपने अधीन कर ले अर्थात्‌ अपने कोष में सम्मिलित कर ले।
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