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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 289
यानस्य चैव यातुश्च यानस्वामिन एव च । दशातिवर्तनान्याहुः शेषे दण्डो विधीयते ।।
रथ, गाड़ी आदि सवारी, सारथि (उनका चालक गाड़ीवान, एक्कावान, कोचवान आदि) और स्वामी, इन पर वक्ष्यमाण (८।२९ १-२९२) दश अवस्थाओं में किसी के मर जाने या किसी सामान के नष्ट हो जाने पर दण्ड नहीं किया जाता तथा इन (वक्ष्यमाण-८।२९ १-२९२) दश अवस्थाओं के अतिरिक्त अवस्था में दण्ड किया जाता है।
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