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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 288
चर्मचार्मिक भाण्डेषु काष्ठलोष्ठमयेषु च । मूल्यात्पञ्चगुणो दण्डः पुष्पमूलफलेषु च ।।
चमड़ा, चमड़े से बने पदार्थ (रस्सी, घी-तेल का कुप्पा, जूता आदि), लकड़ी और मिट्टी के बर्तन, फूल, मूल, (कन्द) तथा फल को नष्ट करने वाला व्यक्ति नष्ट हुए पदार्थों के मूल्य का पाँच गुना धन राजा को दण्ड-स्वरूप में दे, (तथा उन पदार्थो के स्वामी को उन नष्ट पदार्थो का मूल्य देकर तुष्ट करे)।
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