द्रव्याणि हिंस्याद्यो यस्य ज्ञानतोऽज्ञानतोऽपि वा ।
स तस्योत्पादयेत्तुष्टिं राज्ञे दद्याच्च तत्समम् ।।
जो मनुष्य जिस किसी की वस्तु को जान-बूझकर या आज्ञानावस्था में नष्ट करे तो वह मनुष्य नष्ट हुई वस्तु का (वास्तविक) मूल्य उस वस्तु के स्वामी को तथा उतना ही मूल्य दण्ड-स्वरूप राजा को दे।
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