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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 284
वनस्पतीनां सर्वेषामुपभोगो यथा यथा । तथा तथा दमः कार्यो हिंसायामिति धारणा ।।
वृक्ष आदि सब पौधों के फल, फूल, पत्ता तथा लकड़ी आदि के द्वारा जैसा-जैसा उपयोग होता हो, उनको (काटने आदि से) नष्ट करने वाले अपराधी को वैसा-वैसा ही दण्ड (उत्तम साहस आदि) देना चाहिए ऐसा शास्त्रनिर्णय है।
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