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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 282
केशेषु गृह्णतो हस्तौ छेदयेदविचारयन्‌ । पादयोर्दाढिकायां च ग्रीवायां वृषणेषु च ।।
शूद्र यदि अभिमान से ब्राह्मण के बालों को पकड़ ले तो राजा (उस ब्राह्मण को इससे कष्ट हुआ अथवा नहीं, इसका) बिना विचार किये उस शूद्र के दोनों हाथों को कटवा ले और अभिमानपूर्वक मारने के लिए ब्राह्मण के दोनों पैरों, दाढ़ी, गर्दन तथा अंडकोष को शूद्र यदि पकड़ ले तो उसे वही (दोनों हाथ कटवाने का) दंड करे।
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