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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 281
अवनिष्ठीवतो दर्पादद्वावोष्ठौ छेदयेन्नप: । अवमूत्रयतो मेढ्मवशर्धयतो गुदम्‌ ।।
शूद्र यदि ब्राह्मण का अपमान दर्प के कारण थूक फेंककर करे तो राजा उस (शूद्र) के दोनों ओष्ठों को, मूत्र फेंककर करे तो उसके लिङ्ग (मूत्रेन्द्रिय) को तथा अपशब्द (पाद) कर करे तो उसके गुदा को कटवा ले।
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