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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 280
सहासनमभिप्रेप्सुरुत्कृष्टस्यापकृष्टज: । कट्यां कृताङ्को निर्वास्यः स्फिचं वाऽस्यावकर्तयेत्‌ ।।
(राजा) ब्राह्मण के साथ एक आसन पर बैठे हुए शूद्र की कमर को तपाये गये लोहे से दगवाकर निकाल दे अथवा (जिससे मरने नहीं पाये इस प्रकार) उसके नितम्ब को कटवा ले।
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