दण्डशास्रज्ञ (राजा) ब्राह्मण तथा क्षत्रिय के परस्पर में पातक-सम्बन्धी निन्दा करने पर (क्षत्रिय की निन्दा करने वाले) ब्राह्मण पर एक प्रथम साहस अर्थात् २५० पण तथा (ब्राह्मण की निन्दा करने वाले) क्षत्रिय पर एक मध्यम साहस (८।१३८) अर्थात् ५०० पण दण्ड करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।