(राजा) माता, पिता, स्री, भाई, पुत्र, गुरु को पातकादि का दोष लगाकर निन्दा करते हुए तथा गुरु के लिए मार्ग नहीं देते (किनारे होकर मार्ग नहीं छोड़ते) हुए व्यक्ति से सौ पण (८।१३६) दण्ड दिलवावे।
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