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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 270
नामजातिग्रहं त्वेषामभिद्रोहेण कुर्वतः । निक्षेप्योऽयोमयः शंकुर्ज्वलन्नास्ये दशांगुलः ।।
इन (द्विजातियों-ब्राह्मणादि तीनों वर्णो) के नाम तथा जाति का उच्चारण कर (यज्ञदत्त! तुम नीच ब्राह्मण हो) कटुवचन कहने वाले शूद्र के मुख में जलती हुई दश अंगुल लम्बी लोहे की कील डालनी चाहिए।
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