वशाऽपुत्रासु चैवं स्याद्रक्षणं निष्कुलासु च ।
पतिव्रतासु च स्त्रीषु विधवास्वातुरासु च ।।
वन्ध्या, पुत्र या कुल (सपिण्ड) से हीन पतिव्रता विधवा और रोगिणी स्त्रियों की सम्पत्ति की रक्षा भी पूर्वोक्त वचन (८।२७) के अनुसार ही राजा को करनी चाहिये।
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