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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 267
पञ्चाशब्दब्राह्मणो दण्ड्यः क्षत्रियस्याभिशंसने । वैश्ये स्यादर्धपञ्चाशच्छुद्रे द्वादशको दमः ।।
ब्राह्मण (“तुम चोर हो” इत्यादि) कटुवचन क्षत्रिय से कहे तो पचास पण, वैश्य से कहे तो पच्चीस पण और शूद्र से कहे तो बारह पण से वह दण्डनीय होता है।
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