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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 266
शतं ब्राह्मणमाक्रुश्य क्षत्रियो दण्डमर्हति । वैश्योऽप्यर्धशतं द्वे वा शूद्रस्तु वधमर्हति ।।
ब्राह्मण से ("तुम चोर हो” इत्यादि) कटु वचन कहने वाला क्षत्रिय सौ पण, वैश्य डेढ़ सौ या दो सौ पण और शूद्र (तारण-मारण आदि) वध से दण्डनीय होते हैं।
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