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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 265
एषोऽखिलेनाभिहितो धर्मः सीमाविनिर्णये । अत ऊर्ध्व प्रवक्ष्यामि वाक्पारुष्यविनिर्णयम्‌ ।।
(महर्षि भृगुजी ऋषियों से कहते हैं कि--) सीमा के निश्चय करने में सब धर्मो को मैंने कहा, अब कठोर वचन के निश्चय को कहूँगा।
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