मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 264
सीमायामविषह्यायां स्वयं राजैव धर्मवित्‌ । प्रदिशेद्‌भूमिमेकोमुपकषारादिति स्थितिः ।।
चिह्यों (८।२४५-२५१) तथा साक्षियों के अभाव में सीमा का निर्णय नहीं होने पर धर्मज्ञ राजा ही ग्रामवासियों के उपकार को लक्ष्यकर स्वयं सीमा का निर्णय कर दे, ऐसी शास्त्रमर्यादा।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें