सीमायामविषह्यायां स्वयं राजैव धर्मवित् ।
प्रदिशेद्भूमिमेकोमुपकषारादिति स्थितिः ।।
चिह्यों (८।२४५-२५१) तथा साक्षियों के अभाव में सीमा का निर्णय नहीं होने पर धर्मज्ञ राजा ही ग्रामवासियों के उपकार को लक्ष्यकर स्वयं सीमा का निर्णय कर दे, ऐसी शास्त्रमर्यादा।
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