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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 255
शिरोभिस्ते गृहीत्वोर्वीं स्रग्विणो रक्तवाससः । सुकृतैः शापिताः स्वैः स्वैर्नयेयुस्ते समंजसम्‌ ।।
लाल फूलों की माला तथा लाल कपड़ा पहने हुए वे साक्षी शिर पर मिट्टी (के ढेलों) को रखकर अपने-अपने पुण्यों की शपथ (यदि मैं असत्य वचन इस सीमानिर्णय के विषय में कहूँ तो मेरे आज तक उपार्जित संब पुण्य नष्ट हो जाय इस प्रकार शपथ) कर उस सीमा का यथाशक्ति निर्णय करे।
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