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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 250
यानि चैवंप्रकाराणि कालाद्धूमिर्न भक्षयेत्‌ । तानि संधिषु सीमाया अप्रकाशानि कारयेत्‌ ।।
तथा इस प्रकार की जिन वस्तुओं को पृथ्वी बहुत दिनों तक गलाकर 'अपने में न मिला ले, अर्थात्‌ जो वस्तु पृथ्वी में बहुत दिनों तक गड़े रहने पर भी गलकर 'मिट्टी न बन जाय (जैसे उक्त वस्तुओं के अतिरिक्त-- कपास अर्थात्‌ रूई, काला -अज्ञन इत्यादि), उन्हें सीमा पर अप्रकट रूप में स्थापित करे अर्थात्‌ भूमि के नीचे “गाइ दे ।
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