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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 247
उपच्छन्नानि चान्यानि सीमालिङ्गानि कारयेत्‌ । सीमाज्ञाने नृणां वीक्ष्य नित्यं लोके विपर्ययम्‌ ।।
संसार में सीमा के विषय में मनुष्यों का मतभेद सर्वदा देखकर (राजा) दूसरे प्रकार के (आगे कहे गये) गुप्त (नहीं दिखलायी पड़नेवाले) सीमा चिहों को भी बनवावे ।
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