गुल्मान्वेणूंश्च विविधान् शमीवल्लीस्थलानि च ।
शरान्कुब्जकगुल्मांश्च तथा सीमा न नश्यति ।।
(राजा) गुल्म, अनेक प्रकार के बाँस, शमी, लता, ऊ॑चे-ऊंचे मिट्टी के रीले, मूँज, कुब्ज के गुल्मों को सीमापार करे (यथायोग्य लगावे या बनवावे), वैसा करने से सीमा नष्ट नहीं होती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।