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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 242
क्षेत्रिकस्यात्यये दण्डो भागाद्दशगुणो भवेत्‌ । ततो७र्धदण्डो भृत्यानामज्ञानात्क्षेत्रिकस्य तु ।।
किसान के दोष से उसी के पशुद्वारा खेत चर जाने के कारण अथवा असमय में बोने के कारण जितने राजदेय भाग (राजा को कररूप में देने योग्य अन्न) की हानि हो, उसका दशगुना दण्ड उस किसान को होता है तथा यदि किसान की अजानकारी में उसके नौकरों के दोष से उक्त प्रकार की हानि हो तो उस हानि का पाँच गुना दण्ड उस किसान को होता है।
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