पथि क्षेत्रे परिवृते ग्रामान्तीयेऽथ वा पुनः ।
सपालः शतदण्डार्हो विपालान् वारयेत्पशून् ।।
रास्ते या ग्राम व नगर के पास उक्त (७।२३ ९) घेरेवाले खेत के धान्यादि फसल को पशु, रखवाले के रोकने से, किसी प्रकार घुसकर चरने लगे तो राजा उस रखवाले को सौ पण (८।१३६) से दण्डित करे तथा यदि रखवाले के नहीं रहने पर उक्त खेत में पशु चरने लगे तो खेत का स्वामी उसे भगा दे।
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