वृतिं तत्र प्रकुर्वीत यामुष्टो न विलोकयेत् ।
छिद्रं च वारयेत्सर्व॑ श्वसूकरमुखानुगम् ।।
उतनी (८।२३७) भूमि के भीतर धान्य आदि बोये गये खेत का घेरा यदि इतना ऊँचा हो कि बाहर से उँट धान्य को नहीं देख सके तथा उस घेरे के छिद्र से कुत्ते या सूअर का मुँह भीतर नहीं जा सके इस प्रकार खेत का स्वामी छिद्रों को बंद कर दे।
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