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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 237
तत्रापरिवृतं धान्यं विहिंस्युः पशवो यदि । न तत्र प्रणयेहण्डं नृपतिः पशुरक्षिणम्‌ ।।
उतनी (८।२३७) भूमि के भीतर काँटे आदि का घेरा बनाकर बौये गये धान्य आदि को यदि कोई पशु नष्ट कर दे तो राजा पशु के रखवाले को दण्डित न करे।
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