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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 235
तासां चेदवरुद्धानां चरन्तीनां मिथो वने । यामुत्प्लुत्य वृको हन्यान्न पालस्तत्र किल्बिषी ।।
रखवाले के द्वारा घेरने पर वन में झुण्ड बनाकर चरती हुई बकरी या भेड़ को यदि छलाँग मारता हुआ (या चुपचाप अर्थात्‌ धीरे से एकाएक) आकर भेड़िया मार डाले (या ले जाय) तो उसका दोषी चरवाहा नहीं होता है।
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