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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 234
अजाविके तु संरुद्धे वृकैः पाले त्वनायति । यां प्रसह्य वृको हन्यात्पाले तत्किल्बिषं भवेत्‌ ।।
बकरी या भेड़ को, भेड़िया द्वारा रोके जाने पर यदि रखवाला बचाने के लिए नहीं आवे और उस बकरी या भेड़ को भेड़िया बलात्कारपूर्वक ले जाय तो उसका दोषी रखवाला होता है।
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