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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 232
विघुष्य तु हृतं चौरैर्न पालो दातुमर्हति । यदि देशे च काले च स्वामिनः स्वस्य शंसति ।।
यदि घोषणाकार पशु के चोरी होनेके स्थान के पास में रहने पर रखवाला स्वामी को उसकी चोरी होने की उसी समय सूचना दे दे (अथवा-जोर से चिल्लाकर स्वामी को सूचित कर दे), तब वह उस चुराये गये पशु का देनदार नहीं होता है।
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