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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 231
नष्टं विनष्टं कृमिभिः श्वहतं विषये मृतम्‌ । हीनं पुरुषकारेण प्रदद्यात्पाल एव तु ।।
यदि कोई पशु भूल जाय, कृमि आदि से; कुत्ते के काटने से, ऊ॑चे-नीचे स्थान या मार्ग में गिरने से या फँसने से मर जाय, अथवा रखवाले की (उपेक्षाजन्य) पुरुषार्थ-शून्यता से मर या भाग जाय तो उस पशु का देनदार रखवाला ही होता है।
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