मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 229
दिवा वक्तव्यता पाले रात्रौ स्वामिनि तद्गृहे । योगक्षेमेऽन्यथा चेत्तु पालो वक्तव्यतामियात्‌ ।।
स्वामी द्वारा (रखवालों को सौंपे गये पशुओं के योगक्षेम की निन्दा दिन में रखवालों की तथा रखवालों द्वारा स्वामी को घर में सौंपे गये पशुओं के योगक्षेम की निन्दा रात में स्वामी की होती है, अन्यथा (स्वामी के घर में पशु रखवालों द्वारा नहीं सौंपे गये हों अर्थात्‌ रखवालों के जिम्मे ही रात में भी वे पशु हों तब) उनके योगक्षेम की निन्दा रखवालों की ही होती है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
मनुस्मृति के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

मनुस्मृति के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें