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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 228
पशुषु स्वामिनां चैव पालानां च व्यतिक्रमे । विवादं संप्रवक्ष्यामि यथावद्धर्मतत््वतः ।।
(भृगु मुनि ऋषियों से कहते हें कि-) अब मैं पशुओं के मालिकों तथा रक्षकों (रखवाली करनेवालों या चरवाहों) में मतभेद होने पर धर्म-तत्व के अनुसार यथोचित व्यवहार (मतभेद दूर करने के मार्ग) को कहूँगा।
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