(भृगु मुनि ऋषियों से कहते हें कि-) अब मैं पशुओं के मालिकों तथा रक्षकों (रखवाली करनेवालों या चरवाहों) में मतभेद होने पर धर्म-तत्व के अनुसार यथोचित व्यवहार (मतभेद दूर करने के मार्ग) को कहूँगा।
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