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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 227
यस्मिन्यस्मिन्कृते कार्ये यस्येहानुशयो भवेत्‌ । तमनेन विधानेन धम्यें पथि निवेशयेत्‌ ।।
जिस-जिस कार्य को करने के बाद मनुष्य को पश्चाताप हो, उस-उस कार्य में इसी प्रकार (दश दिनों के भीतर - ८।२२२) धर्म युक्त मार्ग में राजा उसे स्थापित करे।
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