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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 224
अकन्येति तु यः कन्यां ब्रूयादद्वेषेण मानवः । स शतं प्राप्नुयाद्ण्डं तस्या दोषमदर्शयन्‌ ।।
जो मनुष्य द्वेष से कन्या को 'यह कन्या नहीं है' अर्थात्‌ क्षतयोनि हो गयी है ऐसा कहे, (और पूछने पर) वह उस कन्या का दोष नहीं प्रमाणित करे तब उसको राजा सौ पण (८।१३६) से दण्डित करे।
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