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मनुस्मृति • अध्याय 8 • श्लोक 223
यस्तु दोषवतीं कन्यामनाख्याय प्रयच्छति । तस्य कुर्यान्चपो दण्डं स्वयं षण्डवतिं पणान्‌ ।।
जो दोषयुक्त कन्या के दोष को नहीं कहकर उस कन्या का दान कर दे अर्थात्‌ उसके साथ विवाह करा दे, राजा उसको स्वयं ९६ पण (८।१३६) दण्डित करे।
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